ये रात बीत जाने दो

मिट गया हो जब आँखों से काजल,अंधकार हो आसमान,आसूओं से जब भरें हो बादल,छिप गया हो चन्द्रमा, रात को जब चिंता सताये,हो ह्रदय में वेदना,पूर्ण हो पाए ना निद्रा,हो परेशान जब जहान, उस समय में याद कर तूसूर्य धुंधला पश्चिमा;बीत जायेगी ये संध्या,सूर्योदय है प्रभात। Ⓒ Vidya Venkat (2022)

नेता

नेता है जैसे कोई नयी तरकारीआज ताज़ी तो कल बासीहै ये चमचा सरकारीजो पटाता है भाषण देकर दुनिया सारीये है वोट मँगा भिखारी इसने बड़ी बड़ी मुश्किलें खड़ी कीजैसे बाबरी, अनपढ़ भी बन जाते नेताजैसे राबरी… सर पर टोपी और गले में मालापहनकर करते हैं ये गड़बड़ घोटालाअरे लोगों इनकी बहकावी बातों में न आनाContinue reading “नेता”

संकल्प

मेरा संकल्प इतना कमज़ोर नहीं कि तेरा जुल्म उसे तोड़ सके मैंने अपना लक्ष्य आसमान की चोटी पर तय किया है, हिम्मत है तो तू भी अपनी ताकत आजमा कर देख ले… © Vidya Venkat (2022)

Is India’s democracy under threat?

On May 4, I took part in an Oxford-style debate on the topic of whether India’s democracy is under threat. The debate was organised by the non-profit organisation Asia Society in Switzerland and the other panelists included Christophe Jaffrelot, Debasish Roy Chowdhury, and Tripurdaman Singh. You can view the full debate here: