आधा चाँद

बचपन में रात को रेल की खिड़की की ओर बैठकर आसमान में आधा चाँद ताकना याद है मुझे. आश्चर्य होता था, चाहे कितनी ही गति से क्यों न रेल का चाक चल रहा हो, पटरियों को घिसते, चीखते, रात को आकुल करते हुए, मगर वो आधा सा चाँद वहीँ एक तस्वीर की तरह आसमान मेंContinue reading “आधा चाँद”

आज फिर उस बात पे रोना आया (ghazal)

आज फिर उस बात पे रोना आया ग़म का अंधेरा फिर घनेरा छाया ज़िन्दगी इश्क़ की उम्मीद में गंवाई हमने हर कदम खुद को अफसोस अकेला पाया। आज फिर उस बात पे रोना आया। … हमसे मत पूछ कहानी दिल कीक्या पता फिर वो पल याद आयाकैसे भूलूँ मैं हकीकत है यहीबेवजह दिल ने मेरेContinue reading “आज फिर उस बात पे रोना आया (ghazal)”

बारिश

ये आसमान से उतर रही बारिश की बूंदेंपानी नही आग की लपटें हैं जैसे,भीग जाने दो मुझे, जल जाने दो मुझे।शायद जुदाई का दर्द बदनसीब परवानों सेबर्दाश्त नहीं होता, इसलिए उन में,लौ से बिछड़ने पर, जल के मर जाने काख़ौफ नहीं रहता।

आहें

आज रात चाँद कुछ ज्यादा ही रौशन है। आसमान का अंधेरा उसकी सफेद चादर तले छुपा हुआ है जैसे। खुश्क मौसम है, हवा बिलकुल भी नहीं, मगर दूर से एक हल्का हवा का झोंका निरंतर सांसें छोड़ रहा है। उस झोंके की आहट सुन सकते हो क्या? इधर, तकिये के बीच दबी हुई मेरी आहेंContinue reading “आहें”

In the storm’s eye

Hear The rumble of the wind, The ominous tune it plays on roof tins. Behold The darkening of the sky, The swift embrace of clouds on the sly. Feel The pounding of the hearts, The rain’s sharp descent, its pointed darts. * This whooshing wind, this eerie sky, This unyielding torrent in the storm’s eye,Continue reading “In the storm’s eye”