नेता

नेता है जैसे कोई नयी तरकारीआज ताज़ी तो कल बासीहै ये चमचा सरकारीजो पटाता है भाषण देकर दुनिया सारीये है वोट मँगा भिखारी इसने बड़ी बड़ी मुश्किलें खड़ी कीजैसे बाबरी, अनपढ़ भी बन जाते नेताजैसे राबरी… हाथ में झंडा और गले में मालापहनकर करते हैं ये गड़बड़ घोटालाअरे लोगों इनकी बहकावी बातों में न आनाContinue reading “नेता”

संकल्प

मेरा संकल्प इतना कमज़ोर नहीं कि तेरा जुल्म उसे तोड़ सके मैंने अपना लक्ष्य आसमान की चोटी पर तय किया है, हिम्मत है तो तू भी अपनी ताकत आजमा कर देख ले… © Vidya Venkat (2022)