खाली घर

बचपन में, घर के पास जो खाली घर था,
वहाँ मैं और मेरी दीदी, ऊंची आवाज़ में,
अपने नाम को पुकार कर उसकी गूँज सुना करते थे।
आज सालों बाद खाली घर में अपने नाम के बजाय
किसी दूसरे के नाम को गूँजता सुन कर
ये ख्याल आया : बचपन और जवानी में यही फर्क़ है
कि उम्र के साथ केवल यादें रह जाती हैं…

© Vidya Venkat

तंगदिल

वो कोई तंगदिल ही होगा,
जिसने प्यार के बदले प्यार ना दिया।
अब हम गिला करें भी तो किस से,
जब मुझे ठुकराने के चक्कर में
वो खुद बर्बाद हुआ…

© Vidya Venkat

गुज़ारिश

नीले आसमान के तले,
सवेरा नींद से जागा है।
सूर्य की नर्म किरणों से
ओस की बूंदे द्रवित हुई।
ऐसे ही कभी एक दिन
तुम आना मेरी जिंदगी में।
सर्दी है, रात बहुत लंबी हो गई…

© Vidya Venkat

आज़ाद

जिन्हे कल तक मेरी बातों से एतराज़ था
उन्हे आज मेरी ख़ामोशी से नाराज़गी है।
मैं आज़ाद हूँ, मेरी आवाज़ भी अब
किसी की मर्ज़ी का मोहताज नही।

© Vidya Venkat